युद्ध के साथ घरेलु उत्पादों में समस्याओं का डेरा बढा और महंगाई भी घर बनाने से लेकर दवा खाना 25-30 फीसदी महंगा हुआ

 

उज्जैन। ईरान अमेरिका युद्ध से घरेलु उत्पादों में समस्यओं का डेरा बढ गया है और महंगाई भी इसके साथ बराबर बढ रही है। घरेलु निर्माण सामग्री पर इसका प्रभाव 25 प्रतिशत तक बाजार में बताया जा रहा है तो दवाईयां भी 30 फीसदी तक महंगी हो गई हैं। यहां तक की एथिकल दवाईयों के साथ ही जैनरिक दवाईयों पर भी इसका असर बताया जा रहा है।

युद्ध के साथ ही खाद्य सामग्री में खाद्य तेल पर महंगाई चढी है तो सूखा मेवा भी महंगाई की गर्मी में है। रसोई घर में सूखे मेवे का उपयोग इसी के चलते कमजोर पड गया है। यही नहीं घर के निर्माण एवं आंतरिक सजावट भी महंगी होती जा रही है। पिछले तीन माह में ही इसमें 25-30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्लाय में बूम,फेविकोल भी महंगा-

घर के निर्माण में जहां सरिया सीमेंट से लेकर अन्य सामग्री महंगी हुई है उसमें प्लास्टिक पाईप के साथ प्लाय में बूम आया हुआ है। करीब 30 प्रतिशत तक इसमें महंगाई बढ गई है। फेविकोल में भी यही स्थिति बनी हुई है। प्रतिकिलो ही इसमें दर बढी हुई है। बताया जा रहा है कि इसके निर्माण का रा मटेरियल आयात किया जाता है जो जहाजों से आता है। वर्तमान में सभी जहाज फंसे हुए हैं ऐसे में इसका मटेरियल भी महंगाई के दायरे में आया हुआ है।

युद्ध की वजह से दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और विदेशों से आने वाले सर्जिकल उपकरणों की कीमतों में भारी उछाल आया है। युद्ध के कारण फार्मा सेक्टर में कच्चे माल की कमी हो गई है, जिससे बाजार में दवाओं की कीमतें बढ़ गई हैं। इसके साथ ही प्रतिवर्ष अप्रेल माह में डीपीसीओ रजिस्टर्ड दवाईयों में 10 प्रतिशत दर बढाने के प्रावधान के तहत भी कंपनियों ने दर वृद्धि की है। महंगाई की मार हड्डियों के इलाज में काम आने वाली कैल्शियम, विटामिन-डी 3 टैबलेट और सिरप पर देखा जा रहा है। नवजात बच्चों के लिए उपयोग होने वाले एंजाइम ड्रॉप (डाइटीस) की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। दवाओं के साथ-साथ पैथोलॉजी लैब में होने वाली जांचें भी महंगी हो रही हैं। मरीजों का ब्लड ग्रुप चेक करने के लिए इस्तेमाल होने वाले एंटी-ए, बी, डी सेट की कीमतों में बढ़ोतरी होने से अब जांच कराना पहले के मुकाबले महंगा हो गया है।इधर सामने आ रहा है कि दवाईयों के निर्माण में लगने वाले रा मटेरियल की भी कमी है और निर्यात में भी दिक्कतें खडी है । ऐसे में कंपनियों ने घरेलु बाजार को अपना निशाना बनाया है। केमिकल और पैकेजिंग मटेरियल की लागत 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। उत्पादन लागत में हुए इस भारी इजाफे के कारण अब कीमतों का भार उपभोक्ताओं पर डालना उनकी मजबूरी बन गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

-डीपीसीओ के तहत पंजीबद्ध कंपनियां प्रति वर्ष अप्रेल में 10 प्रतिशत दर वृद्धि करती हैं। उसी के तहत दर बढी हैं। अन्य उत्पादों पर कंपनियों पर नियंत्रण की स्थिति नहीं है। कई दवाओं के रा मटेरियल बाहर से आता है। अभी कंपनियों का मटेरियल एक्सपोर्ट भी नहीं हो पा रहा है। इसका प्रभाव भी है।

-धर्मेन्द्र कुशवाह , वरिष्ठ औषधि निरीक्षक,उज्जैन

 

 

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